हिंदू भावनाओं को आहत करने के आरोप में जेल में बंद ईसाई नेता को भारतीय अदालत से जमानत
पादरी अरुण पन्नालाल धार्मिक स्वतंत्रता के जाने-माने रक्षक और सत्तारूढ़ भाजपा के मुखर आलोचक हैं।
मध्य भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के उच्च न्यायालय ने एक ईसाई नेता को जमानत दे दी है। उन पर सोशल मीडिया पर कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी पोस्ट करने का आरोप था, जिससे पुलिस के अनुसार हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुई थीं। वह इस मामले में दो महीने से अधिक समय तक जेल में रहे।
छत्तीसगढ़ क्रिश्चियन फोरम के अध्यक्ष और प्रोटेस्टेंट पादरी अरुण पन्नालाल 15 अक्टूबर को रात करीब 8 बजे राज्य की राजधानी रायपुर स्थित केंद्रीय जेल से बाहर आए।
उनके बेटे वैभव पन्नालाल ने UCA News से कहा, “हम सभी राहत महसूस कर रहे हैं और उनकी रिहाई के लिए अपने शक्तिशाली उद्धारकर्ता प्रभु का धन्यवाद करते हैं।”
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की बिलासपुर पीठ ने 14 अक्टूबर को उनकी रिहाई का आदेश दिया था।
76 वर्षीय पादरी, जो राज्य में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मुखर आलोचक हैं, को 7 अगस्त को राजधानी रायपुर स्थित उनके घर से पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
अपने आदेश में न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडे ने पन्नालाल की अधिक उम्र और दो महीने से अधिक समय से न्यायिक हिरासत में रहने का उल्लेख किया। उन्होंने यह भी कहा कि मुकदमे की सुनवाई पूरी होने में अभी समय लगने की संभावना है।
उन्होंने कहा, “मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना, यह अदालत आवेदक को नियमित जमानत पर रिहा करने के पक्ष में है।”
वैभव पन्नालाल ने बताया कि जेल में 12 किलोग्राम वजन कम होने के कारण उनके पिता काफी कमजोर दिखाई दे रहे थे। स्पॉन्डिलाइटिस और पीठ में तेज दर्द से पीड़ित होने के कारण उन्हें चलने के लिए सहारे की जरूरत थी।
उन्होंने कहा, “उन्हें केवल इसलिए जेल में डाला गया ताकि उन्हें परेशान किया जा सके, डराया जा सके और उनकी आवाज दबाई जा सके। वह उत्पीड़ित आदिवासी ईसाइयों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठाते थे।”
राज्य के रायगढ़ के बिशप पॉल टोप्पो ने “दलित [पूर्व में अछूत कहे जाने वाले] और आदिवासी ईसाइयों की आवाज उठाने वाले रक्षक” की रिहाई पर खुशी व्यक्त की।
बिशप ने कहा कि जब भी ईसाई समुदाय के साथ अन्याय या उत्पीड़न होता था, पन्नालाल सबसे पहले सड़कों पर उतरकर विरोध करते थे।
ऑल इंडिया कैथोलिक यूनियन के प्रवक्ता जॉन दयाल ने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता के रक्षक की अपने परिवार के पास वापसी से ईसाई समुदाय खुश है।
उन्होंने कहा, “हमें इस बात में कोई संदेह नहीं है कि उन्हें निशाना बनाने और उनकी आवाज दबाने की एक सोची-समझी योजना के तहत उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।”
पन्नालाल की गिरफ्तारी छत्तीसगढ़ विधानसभा द्वारा नए छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता विधेयक, 2026 को 19 मार्च को पारित किए जाने के कुछ ही दिनों बाद हुई। यह विधेयक 4 अगस्त को राज्य के राजपत्र में प्रकाशित होने के बाद लागू हुआ।
भारत में आपराधिक मामला औपचारिक रूप से दर्ज करने वाले प्रथम सूचना प्रतिवेदन (एफआईआर) के अनुसार, पन्नालाल ने कथित तौर पर हंसराज गोयल की एक फेसबुक पोस्ट पर “बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी” की थी। गोयल ने कई हिंदू देवी-देवताओं का उल्लेख करते हुए हिंदू धार्मिक मान्यताओं पर सवाल उठाए थे।
शिकायत अमित चिमनानी ने दर्ज कराई थी, जो छत्तीसगढ़ में सत्तारूढ़ हिंदू समर्थक भाजपा के प्रवक्ता हैं।
इस गिरफ्तारी से ईसाइयों में चिंता फैल गई, क्योंकि यह राज्य द्वारा धर्मांतरण के खिलाफ एक “हथियार के रूप में इस्तेमाल किए जाने वाले कानून” को लागू करने में भारत के 12 अन्य राज्यों के साथ शामिल होने के कुछ ही दिनों बाद हुई।
समुदाय के नेताओं के अनुसार, नया कानून ऐसा माहौल पैदा करेगा जिसमें किसी व्यक्ति द्वारा स्वेच्छा से धर्म चुनने के अधिकार को संदेह की दृष्टि से देखा जाएगा।
लगभग तीन करोड़ की आबादी वाले छत्तीसगढ़ में ईसाइयों की संख्या दो प्रतिशत से भी कम है।